हिंदी की रोटी खाने वाले अब तो करो विचार

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मेरा मर्म- मेरा दर्द

हिंदी की रोटी खाने वाले हो जाओ सावधान
जरूर करेगा ‘मेरा भारत’ गद्दारों का सम्मान
आज भारत के कई कथित संस्थाएं व व्यक्तित्व
‘हिंदी’ की गाथा गाते हैं, कहते है ‘हिंदी’ बिना भारत नहीं,मैं कहता हूँ भारत में कोई ऐसा लाल नहीं,
यदि किसी को होता मलाल तो कैसे होता भारत का ये हाल।
आज हमारी कोई राष्ट्रीय जुबान नहीं कैसे कहें हम
भारत के लाल हैं कौन सी हमारी राष्ट्रीय जुबान है
बड़ी-बड़ी बातें करते हैं हम मंचों पर
शाल ओढने व माला पहनने के सिवाय
करते क्या हैं हम पूरे भारत में घूमा हूँ,
हर प्रांतियों से पूछा हूँ क्या तुम भारतीय हो
यदि हो तो, दो जवाब दो तुम तुम्हारी है कौन सी जुबान,
तुम्हारी है कौन सी राष्ट्र की भाषा यदि नहीं तो
कैसे तुम भारतीय बनें विश्व में कैसे तुम सम्मानित बनें
जबकि तुम्हारे पास विशाल भाषायी धरोहर है
फिर भी तुम हारे हुए मुसाफिर हो
आओ हम सब मिलकर अपने भारत मॉ को
उसके गुंगापन को हटाकर उसे दिलाएं जुबान
भारत की राष्ट्रभाषा हिंदी को दिलवाएं सम्मान यदि ना जागे
तो खो देगें अपना आज अभिमान विश्व में ना बचेगा हमारा मान
जागो दोस्तों! अपनी भाषा को दिलाओ सम्मान
ना मेरा बेटा है ना मेरी बेटी है मेरी तो बस भारत माँ संस्कृति है
आओ मिल-जुलकर दिलाएं सम्मान विश्व को बताएं
हमारी ‘हिंदी’ है महान जानते हैं क्यों मैं आपसे हूँ रूठा
विश्व मेरे संस्कार को कहा जाता है झूठा
मेरे संस्कार तो भारतीयता को बताता है
भारतीयता जीने व दूसरे को जीना सिखाता है।
आओ हम सबमिल कर विश्व को अहिंसा का संदेश दें
स्वयं जीयें और दूसरे को जीने का मान दें
मेरी बात मान लो, दुनिया को बता दो हम भारतीय हैं,
भारत हमारा है हमसे हैं संस्कार, दुनिया करे विचार
समृद्धि है हमसे, करे दुनिया स्वीकार
‘हिंदी’ हमारी राष्ट्रभाषा घोषित करे भारत सरकार
दिल से निकले मेरे ये विचार आज नहीं तो कब करेंगे
मेरे भारत वासी विचार आओ मिलकर दिलाएं सम्मान
‘हिंदी’ बनें राष्ट्रभाषा ये है मेरे अरमान
जागो भारतवासियों अब तो करो विचार
‘हिंदी’ को बनाओ अपने दैनिक जीवन का आहार
जागो भारतवासियों अब तो करो विचार

- बिजय कुमार जैन ‘हिंदी सेवी’

वरिष्ठ पत्रकार व सम्पादक

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